बचपन की वो दिन
बचपन
की वो दिन, सुहावने
थे नाम,
दूध
की चाय, मिठाई का स्वाद था
जान,
उड़ते
खेलते घुमते, सभी मायूसी मिटाते,
स्कूल
जाने की न थी
घबराहट अब तक याद
है बहुत।
दोस्तों
के साथ हर शाम, था
बचपन में स्वाद,
खिलौने
की खुशबू, देखने का मजा होता
था अलग।
घर
में आकर नाना-नानी की कहानियां सुनाते,
माँ
के सीने में सुकून पाकर नींद सोते।
बचपन
की वो सुनहरी यादें,
जाने कब तलक रहेंगी
याद,
आज
जब देखता हूं बच्चों को खेलते हुए
मैं भी खुश हो
जाता हूं।
ये
बचपन जीते रहना चाहिए, हर समस्या का
हल निकाल लेना चाहिए,
फिर
आसमान की ऊँचाई पर
फुर्सत से उड़ते रहना
चाहिए।
बचपन
ने सिखाया हमें, जीने का सच्चा मतलब,
खुश
रहो और सभी को
खुश करो, ये है जीवन
का सुखद मंत्र।
आज
भी जब याद आता
है वो बचपन का
दौर,
हंसते
हुए यादें लेते हुए लम्हों को संजोते हैं
हम उस सुनहरे वक्त
की छोटी-छोटी बातें सबको समझाते हु
Credit @Anikesh Ansh
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